शुक्रवार, 26 जून 2020

‘‘कांग्रेस’’ को ‘‘जनता की अदालत में ‘‘कटघरे’’ में खडे़ करने में राहुल स्वयं के ट्वीट्स को क्यों ‘‘साधन’’ बनने दे रहे हैं?


15-16 जून की रात्रि को हुई ‘‘गलवान घाटी’’ में हुए खूनी सैनिक संघर्ष में देश के 20 जांबाजों के शहीदी बलिदान के बाद लगातार एक के बाद एक राहुल गांधी के ट्वीट्स आ रहे हैं। इनको पढ़ने के बाद प्राथमिक रूप से यही नजर आता है कि, राहुल गांधी देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी जिसने स्वाधीनता संग्राम आंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग लिया हो को, देशभक्ति, राष्ट्रहित व राष्ट्रीयता के मुद्दे पर जनता की न्यायालय में अनजाने ही स्वयं ही (विपक्ष के द्वारा नहीं) कांग्रेस को कटघरे में खड़े कर दे रहे हैं। इस प्रकार राहुल गांधी इस मुद्दे पर देश की जनता से कांग्रेस पार्टी को सजा दिलाने के लिए वे अपने विपक्षियों को एक मौलिक अवसर बिना मांगे ही अनजाने में दे दे रहे हैं।
राहुल गांधी के कुछ ट्विट्स संदेशों की बानगी देखिए। राहुल गांधी जब यह कहते हैं कि ‘‘प्रधानमंत्री क्यो चुप हैं, क्यो छुप रहे हैं,’’ लेकिन वे प्रधानमंत्री से उक्त प्रश्न करते समय यह भूल जाते हैं कि वे स्वयं कहां ‘‘बाहर‘‘ निकले हुए हैं। यदि ट्विटर के माध्यम से प्रश्न पूछना छुपना न होकर  ‘‘बाहर’’ निकलना होता है तो, यह बाहर निकलना राहुल गांधी को मुबारक। राहुल जी! प्रधानमंत्री, पीएमआंे शुरू से ही लेकर राष्ट्रीय सीमाओं के भीतर के साथ ही अंतरराष्ट्रीय सीमा में भी आवश्यकतानुसार बाहर निकल कर जा रहे हैं, घूम रहे हैं, छुपे हुये नहीं हैं। गलवान घाटी में हुए हिंसक संघर्ष के संबंध में राहुल गांधी विदेशी न्यूज एजेंसी और अपुष्ट सूत्रों के आधार पर ट्वीट्स के माध्यम से प्रधानमंत्री को ‘कॉर्नर‘ करने का प्रयास (असफल) न करें? इससे उनका उद्देश्य तो पूरा नहीं हो पाता है, लेकिन निश्चित रूप से उनके इस तरह के ट्विट्स देश की सेना के मनोबल को तोड़ने वाले हो सकते हैं। इस कारण से ही उनके विरोधियों को राहुल व उनकी पार्टी पर ‘देशद्रोह‘ जैसे गंभीर अपराध का आरोप लगाने का अवसर मिल जाता है। 
इस तरह के संदेशों से कांग्रेस की देशभक्ति पर सवालिया निशान लगने से शत्रु देशों को उक्त संदेशों का हमारे देश के विरुद्ध अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर दुरुपयोग करने का एक बिना मांगा हथियार व अवसर मिल जाता है। जैसा कि पूर्व में पाकिस्तान ने इस तरह के कुछ बयानों का अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपने कुप्रचार का एक साधन बनाया। सवाल राहुल के विरोधियों का उन पर सवालिया निशान लगाने का नहीं है। लेकिन इस तरह के बयानों से निश्चित रूप से भारत की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खराब छवि होती है। जिस कारण से राहुल लगातार जनता के न्यायालय के कटघरे में स्वयं ही आकर के आरोपों के तीर झेल रहे हैं। स्पष्ट है, जनता के न्यायालय में वे स्वयं को स्वतः संज्ञान के द्वारा उक्त रूप में प्रस्तुत कर राजनैतिक आत्महत्या की दिशा की ओर बढ़ रहे है, जिस प्रकार कि उच्चतम न्यायालय भी कई बार महत्वपूर्ण मामलों में स्वतः संज्ञान कर कार्यवाही करता है, लेकिन न्यायालय के निर्णय जनहित में होने से जनता तालियाँ बजाती है। वर्ष 2024 में जनता की अदालत में उक्त मुकदमे का परिणाम क्या होने वाला है, यह आपके सामने भलि-भाँति स्पष्ट है। इसीलिए अभी भी समय है, राहुल गांधी इस कोरोना काल में ऐसे ट्वीट्स को साधन बनाकर आत्महत्या (राजनैतिक) की ओर न बढ़े। वैसे कहीं कोरोना काल में बढ़ती आत्महत्या की संख्या का वायरस राहुल के भीतर ‘‘संक्रमण’’ तो पैदा नहीं कर रहा है? ईश्वर से प्रार्थना है व सरकार से अनुरोध है कि संक्रमित करने वाले साधन ऐसे ‘ट्वीटस’ को कुछ समय के लिये राहुल गांधी की सेहत हेतु लॉकडाउन कर दें। ताकि वे मजबूत होकर स्वस्थ्य विपक्ष की मजबूत भूमिका निभाकर नरेन्द्र मोदी को कोरोना के मुद्दे पर और सही दिशा में कर्मशील कर मजबूत कर सकें। वैसे अधिकांश नागरिक मेरे इस दुःसाहस को असंभव कार्य ही मानेगें। लेकिन इस कोरोना काल में कुछ असंभव से लगने वाले कार्य भी संभव हुये है। क्या अभी लम्बे समय के देशहित के लिये यह संभव हो सकता है? कृपया सच्चे मन से दुआ तो कीजिये? 

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