बुधवार, 2 दिसंबर 2015

‘‘असहिष्णुता‘‘> - <‘‘सहिष्णुता‘‘,आमिर खान + मीडिया’’

  आज जिस तरह पूरे देश में चारो तरफ सहिष्णुता व असहिष्णुता पर बहस चल रही है, उसकी ‘‘गर्म हवा’’ देश की संसद के दोनो सदन तक वृहस्त चर्चा के माध्यम से पहुॅच चुकी है। ऐसा लग रहा है कि देश की समस्त समस्याओं का एक मात्र कारण व इलाज ‘असहिष्णुता’ - ‘सहिष्णुता’ है। यद्यपि बहस ‘‘असहिष्णुता’’ के नाम पर हो रही है लेकिन सहिष्णुता बताये बगैर असहिष्णुता पर बहस पूरी नहीं हो सकती है। यद्यपि असहिष्णुता पर बहस पिछले कुछ समय से खासकर बिहार चुनाव के समय से चल रही है परन्तु फिल्म उद्योग के एक बडे ‘‘आईकॉन’’ आमिर खान की अनजाने में लेकिन सोच समझकर की गई टिप्पणी जिसके द्वारा मूल रूप से उन्होने उनकी पत्नी की भावना को प्रकट किया था, पर पूरे देश में एक बवाल व भूचाल सा मच गया। आमिर द्वारा टिप्पणी बहुत सोच समझकर की गई थी यह इसलिए कह रहा हूॅ कि आमिर ने उस टिप्पणी के बाद एक एक शब्द की दुबारा पुष्टि की थी।
बवाल व भूचाल मचने के मूलतः तीन-चार कारण हो सकते है। एक तो टिप्पणी चूॅंकि आमिर खान ने की है जो देश के तीन सबसे अधिक पसंद किये जाने वाले (जो संयोग वश सभी मुस्लिम) हीरो में से एक है। सत्यमेव जयते, अतुल्य भारत जैसे कार्यक्रम को चलाये जाने के कारण वे फिल्मी आईकॉन से ज्यादा देश के आईकॉन हो गये हैं, दूसरे आमिर खान का मुस्लिम होना, तीसरा आमिर खान की पत्नी का हिन्दू होना, और चौथा बयान के समय का चुनाव। जब समाचार पत्र व इलेक्ट्रानिक मीडिया की डिबेट (बहस) के कारण देश का वातावरण सहिष्णुता व असहिष्णुता के भॅंवर में पहले से ही फंसा हुआ है, तब आम लोगो का ध्यान आमिर के बयान पर ज्यादा गया।
असहिष्णुता (या सहिष्णुता) पर चर्चा कर जो भी लोग उसका जोरदार तरीके से विरोध कर रहे है उन्हें भी इस बात की समझ ही नहीं है कि ‘‘असहिष्णुता भी कभी सार्थक हो जाती है या सहिष्णुता भी कभी घातक हो सकती है’’। वास्तव में 130 करोड़ से अधिक की जनसंख्या वाला देश का प्रत्येक वयस्क नागरिक जिस दिन असहिष्णु हो जायेगा, उस दिन अखंड भारत की कल्पना पूरी हो जायेगी। लेकिन हमारा देश महान भारत सहिष्णुता के मामले में किसी भी देश से श्रेष्ठ सहिष्णु है। इसके लिए हमें किसी व्यक्ति ,संस्था या अन्य देश के प्रमाण पत्र की आवश्यकता बिलकुल नहीं हैं। चौक चौराहों एवं अखबारो सहित समस्त प्रकार के मीडिया में इस संबंध में चल रही बहस क्या यह देश की जनता की सहिष्णुता नहीं दिखाता है? या मीडिया की असहिष्णुता को नहीं दर्शाता है? यह कौन तय करेगा? क्या यह तय करने की आवश्यकता नहीं है? किसी भी बात को लेकर मीडिया जिस तरह लगातार बेवजह बे-बहस चलवाती है, क्या यह मीडिया की असहिष्णुता नहीं है? देश की यथार्थ सहिष्णुता का फायदा लेकर असहिष्णुता का पाठ वास्तव में वे लोग पढाना चाह रहे है जो लोग स्वयं इससे ग्रसित है। उनको स्वयं के सहिष्णु होने की आवश्यकता है।
यह सहिष्णुता का ही परिचायक है जहॉं 130 करोड से अधिक की जनसंख्या के बीच मात्र सैकडो, हजारो लोगो की असहिष्णुता की प्रतिक्रिया आमिर खान के उक्त पुष्टि किये गये बयान के संबंध में आई, जो वास्तव में मूलतः निंदनीय है। निंदनीय इसलिए नहीं कि आमिर खान ने जो कुछ कहा वह व्यक्तिगत रूप से सही नहीं हो सकता है। लेकिन निदंनीय इसलिए कि उसको सार्वजनिक रूप से प्रकाशित कर मीडिया के माध्यम से सम्पूर्ण विश्व के क्षेत्र में प्लेग की महामारी के समान फैला दिया, जिससे देश की बदनामी हुई है, जो कि वास्तविकता के विपरीत कोसो दूर व परे है। देश की सीमा के कुछ भाग पर हमला करने वाले तुलनात्मक रूप से आंतकवादी संगठन कम अपराधी है जिसका सटीक जवाब देकर गौरव पूर्ण रूप से हम सुरक्षित रह सकते है। लेकिन देश की सहिष्णुता के कारण ही अनजाने में ही आमिर खान का देश पर असहिष्णुता का आक्रमण वाइरल के समान विश्व में फैल गया जिसको हमें सुधारने के लिए कड़ी मेहनत करना पड़ेगी व लम्बा समय भी लगेगा। वास्तव में आमिर खान को अपनी पत्नी से ही प्रेरणा लेना चाहिए जो सहिष्णु है वे इसलिये कि वे स्वयं की नजर में असहिष्णुता की भुक्त - भोगी होने के बावजूद उन्होंने अपने विचार को वाइरल नहीं किया, बल्कि पति को बताकर उनके साथ शेयर करने का प्रयास किया। यदि वे चाहती तो स्वयं ही मीडिया के माध्यम से बात कर सकती थी।
जब हम देखते है कि आम लोगो के सामने किसी व्यक्ति को मारा जाता है गोलियों से भूना जाता है, महिलाओं के साथ अश्लीलता की जाती है तथा सभी मूक दर्शक बने रहते है तब हमारी सहिष्णुता सहनशीलता ,क्या प्रशन्सनीय होती है? तब वक्त की मांग असहिष्णु होने की होती है। इसलिए आलोचक, समालोचक, लेखक, विचारक, बुद्धिजीवी, और डिबेट करने-कराने वाले देश को सहिष्णु व असहिष्णु अलग अलग खानो में या मत में न बंाटे, बल्कि नागरिको को सिर्फ इस बात की प्रेरणा दे कि वक्त पर वक्त की मांग के अनुसार सही रूप से सहिष्णु - असहिष्णु रहे, तभी हमारा उद्धार होगा। देश का उद्धार होगा।
फिल्मी कलाकार आमिर को इस बात पर अवश्य विचार करना चाहिए कि सेक्स परदेे के अंदर ही मान्य है। उसी प्रकार उनके या उनके परिवार के आहत विचार जिसके आहत होने का कोई सीधा या परोक्ष कारण देश की सरकार से नहीं है तब उन्होंने देश के आन बान सम्मान पर किसी दूसरे व्यक्ति को प्रश्न् चिन्ह लगाने का अवसर (अनजाने में ही सही) क्यों प्रदान किया? अन्ततः आमिर की पत्नी को कब महसूस हुआ कि ‘असहिष्णुता’ के कारण उनके जीवन पर संकट आया है? पूर्व में आमिर ने स्वतः देश व मोदी के नेतृत्व की तारीफ की थी तो फिर अचानक क्या घट गया कि पत्नी किरण राव के बहाने उन्हे देश का वातावरण इतना असहिष्णु महसूस होने लगा कि वे विदेश में स्थानांतरण की बात करने लगे। ऐसी कौन सी घटना उनकी पत्नी व उनके परिवार के साथ घटित हुई जिस कारण उनमें उक्त भावना उत्पन्न हुई? क्या आमिर खान यह बताने का कष्ट करेगे की उनकी फिल्म से रूष्ट होकर जनता ने कभी उनके परिवार को घमकी दी? क्या आमिर खान यह बतलायेगे कि उनके किस पड़ोसी ने धमकी दी? क्या आमिर खान यह बतलाने का प्रयास करेगे कि उनसे किस डॉन ने पैसे वसूली की मांग की जिस कारण उक्त भावना उत्पन्न हुई? इस संबंध में क्या उन्होने कोई प्रथम सूचना पत्र जान के खतरे के रूप में दर्ज कराई? यदि यह सब नहीं हुआ है तो ऐसेे में आमिर खान व पत्नी को बताना ही होगा कि पिछले आठ महीनों में ऐसी कौन सी घटना हुई है जिसके कारण 130 करोड के देश में अन्य नागरिको के मन में आमिर की पत्नी किरण राव के मन में वह विचार आया व दहशत की भावना उत्पन्न हो गई जो 130 करोड़ नागरिको के दिल में उत्पन्न न हो सकी जबकि आमिर की तुलना में आम नागरिको को वैसा सुरक्षा तंत्र तथा आईकॉन के पावर के दम पर उपलब्ध सुरक्षा शक्ति प्राप्त नहीं थी जिस कारण आम नागरिको को तो आमिर खान से ज्यादा डरना चाहिए था।
अन्त में आमिर को देशद्रोही कहना ज्यादती होगा लेकिन उनके द्वारा की गई हरकतों से देश को जो नुकसान हुआ है व देश की छवि का जो ह्रास हुआ है वह किसी देशद्रोही द्वारा की गई कार्यवाही से कम नहीं है।  

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