मंगलवार, 14 जुलाई 2020

कोरोना’ से ‘‘सावधानियों के नियम‘‘ क्या अति महत्वपूर्ण व्यक्तियों पर लागू नहीं है?*


देश के कई चीजों व विषय वस्तुओं के ब्रांड एंबेसड़र ‘‘महानायक‘‘ अमिताभ बच्चन के ‘‘कोविड-19 के पॉजिटिव‘‘ पाए जाने पर पूरे देश में चिंता की लहर सी फैल गई है, जो स्वाभाविक भी है। देश विदेश में उनके अनगिनत करोड़ों प्रशंसक हैं। साथ ही वे अपनी विशिष्ट शैली में अनेक मुद्दों व ज्वलंत समस्याओं के बाबत आवश्यक जानकारी मीडिया के माध्यम से नागरिकों के बीच प्रस्तुत करते रहते हैं। इक्कीसवीं सदी के अभी तक के वे देश के एक सबसे बड़े ‘‘आईकॉन‘‘ व ‘‘ब्रांड एंबेसडर‘‘ हैं। देश में कही भी किसी भी संकट की स्थिति के होने पर उनसे निपटने के लिए सरकार से लेकर मीडिया तक सभी जनहित में उनकी इस ब्रांड एंबेसड़र के रूप में पहचान का प्रभावी उपयोग करते हैं।
देश की ‘‘धरोहर‘‘ अमिताभ बच्चन ही नहीं देश के अनेक मुख्यमंत्री, मंत्री गण, आईएएस अफसर इत्यादि सहित अनेक ‘वीवीआईपी’, ‘वीआईपी’, ‘आईपी’ कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। उन्हें क्वॉरेंटाइन में रहना पड़ा है। भारत ही नहीं विश्व के अनेक देशों में राष्ट्र प्रमुख से लेकर मंत्री गण और वीआईपी कोविड-19 से संक्रमित हुए हैं।
प्रश्न यह उत्पन्न होता है कि वीआईपी या ब्रांड एंबेसडर जैसे प्रमुख व्यक्ति जो स्वयं नागरिकों को कोविड-19 से बचने के लिए सावधानीयाँ बरतने का संदेश लगातार दे रहे हैं, वे सब कैसे संक्रमित होते जा रहे हैं। इसके दो ही अर्थ निकलते हैं। एक इन वीवीआईपीज द्वारा निर्धारित सावधानियों का स्वयं द्वारा पूर्णतः पालन नहीं किया गया है। अथवा जो सावधानियां इनके द्वारा बतलाई जा रही हैं, वह आधी अधूरी व पूर्णतः सही नहीं है। हम क्या माने? विश्व स्वास्थ संगठन ने मास्क तथा ‘फेस मास्क’ का उपयोग, बार-बार हाथ धोना, सेनेटाईजेशन करना, 6 फीट की मानव दूरी बनाये रखना ये सब प्रमुख सावधानी बरतने की एड़वाइजरी जारी की हुई है। यद्यपि अभी हाल में ही कुछ देशों के वैज्ञानिकों का एक सामूहिक बयान जरूर आया है, जिसमें उन्होंने हवा के माध्यम से कोरोना वायरस के ड्रॉपलेट होने की आशंका जरूर व्यक्त की है। विश्व स्वास्थ संगठन ने भी अधिकारिक रूप से उक्त निष्कर्ष को मान्यता दे दी है।
इसका यही मतलब निकलता है कि अमिताभ बच्चन से भी पर्याप्त सावधानी बरतने में कहीं न कहीं चूक अवश्य ही हुई है। क्योंकि अमिताभ बच्चन ही नहीं उनका पूरा परिवार ही (जया बच्चन को छोड़कर) संक्रमित हो गया है। ‘‘ईश्वर से मैं यही ‘‘दुआ‘‘ करता हूं और पूरा देश भी यही कर रहा है कि, जिस प्रकार वे पूर्व में भी जीवन की समस्त बाधाओं को पार कर शतायु की ओर अग्रसर हो कर, देश की लगभग निस्वार्थ सेवा कर रहे हैं, ‘‘ईश्वर‘‘ उन्हें शीघ्र स्वास्थ्य लाभ प्रदान कर नियमित दिनचर्या करने में उन्हें पुनः पूर्ण रूप से स्वस्थ करें। लेकिन अमिताभ बच्चन से अंत में एक बात का जरूर अनुरोध करूंगा कि वे इस बात को सार्वजनिक रूप से जरूर स्वीकारे कि उनसे कहीं न कहीं की कुछ असावधानी अवश्य हुई है। अन्यथा वे संक्रमित नहीं होते। जिसका एक परिणाम यह हो सकता है कि उनके द्वारा नागरिकों को कोरोना वायरस से बचनेे के लिए सावधानी बरतने की दी जाने वाली शिक्षा संदेश में लोग कहीं कोई कमी को महसूस या ढूढ़ने न लग जाए। क्योंकि अमिताभ बच्चन के एक-एक शब्दों का अपना एक इतना भारी वजन होता है, जिसे अनगिनत जनता अनुसरण करती हैं। इसलिये जिस प्रकार उन्होंने स्वयं आगे आकर अपने संक्रमित होने की जानकारी ‘दुनिया’ को देकर अपने विराट व्यक्तित्व का परिचय दिया है। ठीक वैसे ही, वे कैसे असावधानी बरतने के कारण संक्रमित हुये, इसकी भी यथा संभव जानकारी अपने करोड़ों प्रंशसकों के साथ शेयर कर, वे अपने व्यक्तित्व को और विराट कर सकते है। अंत में एक बात और! अमिताभ बच्चन का इलाज हेतु नानावटी अस्पताल में भर्ती होना तथा कोरोनावायरस संक्रमित होने के कारण अभिनेत्री रेखा के निवास को भी भी सील करने की घटना को एक "इत्तेफाक संयोग" के रूप में प्रचारित करने का क्या औचित्य है ?
                                  धन्यवाद!

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