बुधवार, 14 जनवरी 2015

‘‘ध्यानचंद’’ पर ‘‘ध्यान’’‘चंद’ लोगो का कब जायेगा ?


  • पिछले कुछ समय से जब भी भारत में ''नोबेल'' पुरस्कार की घोषणा होती है तब- तब मेजर  ध्यानचंद का नाम 'सुर्खियो' मंे आने के बावजूद वास्तविक रूप नहीं ले पाता है। जब ''खेल'' मंे पहली बार सचिन तेंदूलकर को भारत रत्न दिया गया था तभी  यह विवाद का विषय था कि 'खेल' मे भी भारत रत्न दिया जा सकता है अथवा नहीं। इसके पूर्व किसी भी खिलाड़ी को भारत रत्न नहीं दिया गया था। सचिन तेंदुलकर को भी भारत रत्न दिये जाने की मांग खेल मंे उठी थी और तब नियम मंे संशोधन तक किये जाने की बात भी कही गई थी। यद्य्पि ध्यानचंद की परिस्थितियो और योगदान की तुलना किसी भी प्रकार कही भी कभी भी की ही नहीं जा सकती है। चॅूकि क्रिकेट का खेल एक ग्लेमर, भीड भाड़ व पैसे से भरा हुआ है और शायद शासन भी तेंदुलकर की लोकप्रियता का फायदा उठाना चाहता था, तेंदुलकर 'भारत रत्न' पा गये लेकिन ध्यानचंद इससे वंचित रह गये। अभी हाल में ही भारत सरकार द्वारा भारत रत्न माननीय पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी एवं पंडित मदन मोहन मालवीय को दिया गया जिन पर कोई उॅगली नंही उठाई जा सकती, अपितु इसके लिए भारत सरकार को बंधाई दी जानी चाएिये। भारत सरकार एक वर्ष मंे अधिकतम् तीन लोगो को 'भारत रत्न' दे सकती है। लेकिन वर्ष 2014 के त्रि रत्नो में भी ध्यानचंद शामिल नहीं हैं। प्रश्न यह नहीं है कि ध्यानचंद को भारत रत्न इस वर्ष भी क्यो नहीं दिया गया ,बल्कि यह एक अनुत्तरित प्रश्न है। इसमें ध्यानचंद का क्या दोष है ? उनका कहीं यह दोष तो नहीं कि वे राजनीतिज्ञ नहीं है या उनकी आज राजनैतिक अपील नहीं है? मरणोप्रांत उनको पुरस्कार क्यों नहीं दिया जा सकता है? इन सब प्रश्नो का जवाब भारत सरकार को ही देना है। इतना तो तय है कि उनकी योग्यता को चार चॉद लगाने के लिए वे भारत रत्न के मोहताज नहीं है। बल्कि  भारत रत्न उन्हे इसलिए दिया जाना आवश्यक है ताकि कि भारत रत्न की महत्ता, प्रभुता व सर्वकालीन स्वीकरिता बनी रहे। अतः बार बार यही प्रश्न नागरिको के दिमाग में आता रहेगा कि आखिर कुछ 'चंद' लोगो का 'ध्यान' कब ''ध्यानचंद'' पर आयेगा क्योकि कुछ 'चंद' लोग ही तो यह निर्णय लेते है। इसी इंतजार में........!
 

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