शनिवार, 21 जून 2014

क्या राजनैतिक आंदोलन के सिद्धांत बदल गये है?

                           क्या राजनैतिक आंदोलन के सिद्धांत बदल गये है?
                                                                                                              
        दिल्ली में बिजली  पानी व अन्य मुददे को लेकर दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अरविंद लवली के नेतृत्व मंे कांग्रेस ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शन करना कोई नही बात नही है न ही गैर कानूनी है। लेकिन अभी केन्द्रीय सरकार को आये एक महीना भी नही हुआ है और उसके खिलाफ मंहगाई जैसे मुददा जो स्वतंत्रता के बाद से चला आ रहा न खत्म होने वाला मुददा है व केन्द्रीय सरकार (क्योकि राज्य में राष्ट्रपति शासन होने के बाद केन्द्रीय सरकार ही जिम्मेदार मानी जायेगी ) के विरूद्ध आंदोलन करना क्या राजनैतिक रूप से नैतिक माना जायेगा प्रश्न यह है? उससे भी आश्चर्य की बात यह है कि उक्त आंदोलन न केवल भाजपा के विरूद्ध था बल्कि आप पार्टी के भी विरूद्ध था और आप पार्टी के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की गई। "आप" पार्टी न तो केन्द्र में सत्ता में है न ही दिल्ली राज्य में। इसलिए उसके विरूद्ध आंदोलन क्या कोई आंदोलन की कोई नयी नीति सिद्धांत केा व्यक्त करता है प्रश्न यह है? बिजली पानी व अन्य किसी मुददे पर अब आप पार्टी के खिलाफ आंदोलन करने का क्या औचित्य है जबकि जनता ने उसे नकार दिया। इससे तो यही लगता है अब भी "आप" पार्टी का डर  दिल्ली के राजनीति में अन्य दूसरी राजनैतिक पार्टी को है।
        जहां तक भाजपा के विरूद्ध आंदोलन का प्रश्न है ? दस साल तक केन्द्र में और पन्द्रह साल तक दिंल्ली मे कांग्र्रेस पार्टी की सरकार रहने के बावजूद अभी भाजपा की सरकार बने तीस दिन भी नही हुए है, कांग्रेस पार्टी को कोई भी राजनैतिक आंदोलन भाजपा के विरूद्ध करने का नैतिक अधिकार नही है क्योकि कोई त्वरित घटना नही घटी है जिसका संबंध पूर्व से न हो। बिजली की समस्या यदि कोई है तेा वह पूर्व से चली आ रही है जिसके लिए दिल्ली शासन की विद्युत व औद्योगिक नीति है। नई सरकार से तीस दिन में जबकि दिल्ली में राष्ट्रपति शासन है कोई त्वरित निर्णय व उस निर्णय से उत्पन्न त्वरित लाभ की उम्मीद नही की जा सकती है। इसलिए कांग्रेस पार्टी को धैर्य व संयम बरतना चाहिए। उन्हे इस बात का तो अवश्य ध्यान रखना चाहिए कि आप  पार्टी को न तो दिल्ली विधानसभा मे जनादेश सरकार बनाने के लिए दिया गया था और न ही  आप को बिना शर्त समर्थन के बनी "आप" सरकार को  आप ने चलने दिया। इसलिए आप के खिलाफ आंदालन करना नितांत गैर जिम्मेदाराना है।
        आशा है कांग्रेस स्वच्छ विरोध का अपना रोल जो उसे दिया गया है व अदा करेगी ताकि सरकार पर प्रभावी अंकुश बना रहे।
       
                        

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