मंगलवार, 31 अगस्त 2010

'भगवा'-आतंकवाद, 'हरा'-आतंकवाद, 'लाल'-आतंकवाद या चिदबरम-आतंक?




        हमारे केंद्रीय गृहमंत्री पी.चिदबरम ने पुलिस प्रमुखों के समेलन में ''भगवा आतंकवाद'' का नया शगूफा छोड़ दिया। वैसे इस  केंद्रीय मंत्रिमंडल के कई मंत्री बयानों के मामले में शूरवीर की प्रसिद्धी प्राप्त कर चुके है। उस
दृष्टि से पी. चिदबरम का बयान उसी कड़ी को लिये हुये है। भारत देश के वर्तमान गृहमंत्री के राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घट रही घटनाओं पर बयान या उठाये गये कदम चाहे वह आतंकवाद का मामला हो, नकसलवाद का मामला हो, काश्मीर की समस्या का मामला हो, या देश में घटित कोई भी अन्य महत्वपूर्ण मामला हो वे देश के अभी तक के सबसे असफल गृहमंत्री सिद्ध होते जा रहे है। चिदबरम स्वयं एक बहुत ही पढ़े लिखे विज्ञान, बौद्धिक और इक्कीसवीं सदी के आधुनिक मंत्री माने जाते है और उनकी तुलना में ज्ञानी जैल सिंग से की जाय जिन्हे अनपढ़ मंत्री कहा गया था (यद्यपि गुरूमुखी में उनकी बहुत कमाण्ड थी) उनसे भी ज्यादा असफल मंत्री सिद्ध हो रहे है।
भगवा
केंद्रीय शासन का और खासकर गृहमंत्री का यह मूल दायित्व है कि वह देश में फैले आतंकवाद की जड़ो को उस तरह से मूल रूञ्प से समाप्त करें जैसे उनके पूर्ववर्ती गृहमंत्री एवं केञ्न्द्रीय शासन ने पंजाब में आतंकवाद को समाप्त किया था। लेकिन चिदबरमजी आतंकवाद को समाप्त करने के बजाय नये-नये आतंकवाद को गढक़र कौनसी राजनीति करना चाहते है ये आम जनता के समझ के परे है। यद्यपि राजनैतिक लोग उनकी भाषा को और भावार्थ को समझ गये है और इसलिए उसकी तीव्र प्रतिक्रिया भी हुई है।
                        सभी जनप्रतिनिधी, राजनैतिक पार्टीया जिसमें कांग्रेस पार्टी (जिसके गृहमंत्री भी सदस्य है), भी शामिल है विभिन्न संगठन एवं संस्थाए सब लोग एक आवाज में हमेशा से यह कहते आये है, कि आतंकवाद का न तो कोई रंग होता है और न ही धर्म होता है। कांग्रेस प्रवक्ता शकील अहमद ने भी कल यही बात कही है। भगवा आतंकवाद कहने के पहले गृहमंत्री को हरा-लाल या सिक्ख आतंकवाद नहीं दिखा? क्योंकि ये शब्द उनकी राजनीति को वह प्रभाव नहीं देते है जिस उद्देश्य के लिए उन्होने उक्त शब्द का गठन कर डाला। क्या 'भगवा' शद का अर्थ केंद्रीय गृहमंत्री जानते है? कुछ आतंकी घटनाओं अजमेर, मालेगांव गोवा आदि में तथाकथित रूप से अभिनव भारत या आर.एस.एस. से जुडे़ हिन्दू के कारण शायद गृहमंत्री ने उक्त शद की उत्पति की होगी। गृहमंत्रीजी को यह मालूम होना चाहिए कि भारत में हो रही आतंकी घटनाओं में यदि कोई भारतीय उससे जुड़ा है, उसमें संलग्र है तो वह व्यक्तिगत हैसियत से है न कि संस्थागत हैसियत से जिसकी न केवल सर्वत्र निंदा की जानी चाहिए बल्कि उसके खिलाफ कठोरतम कार्यवाही कर उसे नागरिकता से भी वंचित किया जाना चाहिए। लेकिन यदि वह व्यक्ति किसी परिवार का, संगठन का या संस्था का सदस्य है तो इसका यह मतलब नहीं है कि उस परिवार, संगठन या संस्था ने उसको उक्त कार्य करने के लिए प्रेरित किया, उत्पे्रित किया, ट्रेनिंग दिया। हमारे देश में हजारों मामले ऐसे है जहां विभिन्न नागरिकगण चोरी से लेकर बलातकार और हत्या के मामले में आरोपित होकर सजा पा चुके है उनमें से बहुत से लोग विभिन्न राजनैतिक पार्टियों से लेकर अनेक प्रतिष्ठित समाज सेवा संगठनों से जुड़े है जिनका उल्लेख करना समय की बरबादी होगी। लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि वे सब पार्टी या संगठन उक्त कृत्य के लिए उत्तरदायी है। बल्कि व्यक्तिगत रूप से उन अपराधियों ने जो कृत्य किया उसके लिए उन्होने सजा भी भुगती। इसी प्रकार यदि किसी भगवा वस्त्र धारी ने राष्ट्र हित के खिलाफ कोई काय किया है, आतंकी घटना में सहयोग किया है तो उसे निश्चित रूप से सजा दी जाना चाहिए। लेकिन क्या माननीय गृहमंत्री देश की जनता को यह बताने का कष्ट करेंगे कि कोई भी भगवा धारी संगठन या हिन्दू संगठन हमारे देश में पाया गया जिसके खिलाफ आतंकवादी होने के कोई भी सबूत केंद्रिय सरकार या उसके अधीन सीबीआई, रॉ या अन्य कोई संस्था के पास है? और यदि है तो उन्हे अदालतो या जनता के सामने प्रस्तुत क्यों नहीं किया जाता है। 'भगवा' शद का अर्थ चिदंबरम जानते है? भगवा रंग आदिकाल से पूजा का रंग है इसे हिन्दू धर्म मानने वाले मानते है। पी. चिदंबरम भी हिन्दू है इस दृष्टि से वे भी भगवा रंग को पूजा स्थल का रंग मानते होंगे। कुछ सिरफिरे हिन्दुओं के आतंकवाद में लिप्त (चिदंबरम के शब्दों में) होने मात्र से ही सपूर्ण भगवा रंग को गाली देने का अधिकार चिदंबरम को नहीं है। इसके विपरीत अलकायदा, तालीबान, सिमी, लश्कर ए तोयबा, जैस-ए-मोहमद से लेकर विभिन्न नामों से नये उगते मुस्लिम आतंवादी संगठन है जिनकी आतंकी घटनाओं को इस देश ने झेला है। चाहे वह काश्मीर का मामला हो या मुबई बम कांड हो या २६/११ का मुबई का मामला हो तब चिदंबरम को हरा आतंकवाद नहीं दिखा? मुसलमानों के पूजा का प्रतीक हरा रंग है। माओवादी से नकसलवादीयों द्वारा की जा रही दिन प्रतिदिन तोडफ़ोड़ की घटनाओं में चिदंबरम को लाल आतंकवादी नहीं दिखता? मै ही नहीं इस देश का अधिसंख्यक जनसमुदाय जातीय, धर्म या विचारधारा के आधार पर लाल या हरा आतंकवाद नहीं मानता है पर तब माननीय चिदंबरम साहब इस तरह के बयान देकर देश के कुछ भागों में उत्पन्न हुई अशांत स्थिति को पूरे देश में क्यों झोंकना चाहते हैं? रामजन्मभूंमि मामले में सभवतः आगामी १६ तारीख को आने वाले निर्णय के पूर्व चिदबरम का बयान कोई सोची-समझी चाल के तहत तो नहीं है? चिदबरम का दायित्व है कि उनके बयान से जो एक शंका और आक्रोस की लहर देश में उठी है वे इसे तुरंत दूर करें अन्यथा प्रधानमंत्री को ऐसे गृहमंत्री को तुरंत मंत्रीमंडल से बर्खास्त कर देना चाहिए।

2 टिप्‍पणियां:

  1. आतंकवाद का किसी धर्म विशेष से सम्बन्ध नहीं होता है, या यूँ कहें की आतंकवादी का कोई धर्म नहीं होता है. ऐसे लोगों को आप धर्म के व्यवसायी कह सकते हैं, जो अपने फायदे के लिए धर्म को इस्तेमाल करते हैं.

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